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वेटिकन सिटी, वह छोटा सा देश जहां पोप रहते हैं

  • Writer: Yasha Mathur
    Yasha Mathur
  • Nov 30, 2022
  • 5 min read

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जब आप इटली घूमने जाएंगे तो रोम पहुंचते ही सबसे पहले आपको वेटिकन सिटी देख आने की सलाह दी जाएगी क्‍योंकि यह राेम में ही मौजूद छोटा सा देश है जिसे अब से कुछ पहले तक दुनिया का सबसे छोटा देश होने का दर्जा हासिल था। इस अनोखे देश में धर्म गुरु पोप रहते हैं और यहां के सदियों पुराने चर्च में वास्‍तुकला और चित्रकला के अद्भुत नमूने देखने को मिलते हैं ...


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क्रिसमस के मौके पर वेटिकन सिटी से आने वाले पोप के संदेश का इंतजार हर किसी को रहता है कि पोप का संदेश मानवता के किस पहलू को छूने वाला है। ऐसे में पोप का निवास स्थान वेटिकन सिटी और महत्वपूर्ण हो जाता है। कैसा था वेटिकन की यात्रा का मेरा अनुभव, आइए आपको सिलसिलेवार बताती हूं। यूरोप की यात्रा का पहला दिन था वह। रोम में 10 सितंबर की सुबह थी और वेटिकन सिटी जाने का प्लान था। सुबह सवेरे ही पहुंचना था वेटिकन सिटी के द्वार पर, क्योंकि जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ता है टूरिस्ट ग्रुप्स की लाइनों में इजाफा होने लगता है। टूर डायरेक्टर का कड़ा निर्देश था कि कोई लेट न करे और वेटिकन देखने का इतना चार्म कि चालीस से ज्यादा सैलानियाें का समूह निर्धारित समय पर बस में सवार था।


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मन में सवाल बहुत थे कि कैसा होगा वेटिकन सिटी ? दुनिया का सबसे छोटा देश, जो केवल 108 एकड़ में बसा है। जहां मात्र हजार के करीब लोग रहते हैं। जहां के अपने सिक्के, अपना डाक विभाग, रेडियो और अपनी सेना है। यहां कोई जन्म नहीं लेता, जब कोई पोप बनता है तो यहां की जनसंख्या बढ़ती है। माना जाता है कि सेंट पीटर को वेटिकन पहाड़ी पर सूली पर चढ़ाया गया और बेसिलिका की पहाड़ी पर दफनाया गया। यह तो पढ़ा था कि रोम के भीतर मौजूद इस अनोखे देश में धर्म गुरु पोप का निवास स्थान है और रोमन कैथोलिक चर्च ने इसे पूरे विश्व में अनोखा बना दिया है, लेकिन यहां कलाकृतियों का इतना भंडार देखने को मिलेगा, कल्पना से भी दूर था।


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कुछ साल पहले वेटिकन म्यूजियम देखने के लिए हमें अलग से 60 यूरो देने थे। इसे देखना टूर पैकेज में शामिल नहीं था लेकिन रोम जाकर भी वेटिकन नहीं जाना यूरोप का एक महत्वपूर्ण स्थान मिस कर देने जैसा था। खैर, रोम की टाईबर नदी के किनारे बसे वेटिकन सिटी को देखने जाना ही था और इस ऑप्शनल विजिट के लिए परहेड 60 यूरो देने ही थे। टूरिस्ट कोच के पहुंचने पर लोकल गाइड फेबिलियो साथ हो लीं। इतालवी एक्सेंट में उनकी अंग्रेजी कुछ समझ आ रही थी कुछ नहीं। वहां कई टूरिस्ट ग्रुप हमसे पहले ही पहुंचे थे। इनके लोकल गाइड अपनी पहचान के लिए झंडा या छतरी लिए थे। इन्हीं के पीछे हमारे ग्रुप ने भी खड़े हाने की जगह बना ली। सोमवार को वेटिकन जाना काफी मुश्किल भरा लगा क्योंकि एक दिन की छुट्टी के बाद भीड़ काफी बढ़ जाती है। किसी किले की दीवारों जैसी थीं यहां की ऊंची दीवारें। सितंबर के महीने में रोम की गर्मी लगभग झुलसा देने वाली थी। पहले दिन हुई टेनिंग कई महीनों तक बरकरार रही। सूरज तेज था लेकिन जोश भी कम नहीं था। लंबे इंतजार के बाद सुरक्षा जांच की हर प्रक्रिया से गुजरते, जब हम वेटिकन म्यूजियम में दाखिल हुए तो आंखें विस्मित रह गईं। गाइड ने मोटे तौर पर जानकारी दी कि हमें कैसे, कहां जाना है।


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वेटिकन म्यूजियम में छत व दीवारों पर बनी पेंटिंग्स, मूर्तियां और अन्य इंस्टॉलेशंस अविस्मरणीय हैैं। निशब्द सी मैं हर कला को अपने मोबाइल के कैमरे में कैद कर लेना चाहती थी लेकिन यह असंभव था। कहते हैं कि सेंट पीटर बैसिलिका को पांच सौ साल भी ज्यादा समय तक कलाकार सजाते रहे। यहां बनी एक पेंटिंग को देखने में एक मिनट लगाएं तो पूरा म्यूजियम घूमने में चार साल लग जाएंगे। हर पेंटिंग एक कहानी कहती हुई चलती है।


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खूबसूरत ऊंचे डोम नजर में बस गए थे। काफी समय तो ऊपर देखते हुए ही गुजरा। कला के एक-एक नमूने को देखते हुए हम आगे बढ़ रहे थे कि हम मुख्य चर्च में दाखिल हुए। यहां की छत माइकल एंजेलो की पेंटिंग्स से सुशोभित है। टूर गाइड बता रही थीं कि माइकल एंजेलो ने 84 फीट की इस हाइट पर ऊपर देखते हुए पेंटिंग्स बनाईं जिससे आखिर में उनकी आंखें चली गईं थी।


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यह चर्च यूनेस्को द्वारा घोषित धरोहर है। हर साल 50 लाख से ज्यादा लोग इसे देखने आते हैं। वैसे तो 44 हेक्टेयर में बसा यह पूरा देश ही वर्ल्ड हेरिटेज साइट है। चर्च के अंदर फादर प्रेयर कराते हैं। यहां भीतर की फोटो खींचने की सख्त मनाही है। चर्च से बाहर आने पर खुले में वेटिकन सिटी का रूप और भी मनमोहक था लेकिन तेज धूप मजा किरकिरा कर रही थी। भवनों का आर्किटेक्चर रोम की कला व संस्कृति को बयान कर रहा था। कहा जातााहै कि कैथलिक चर्च के पोप को ईसा मसीह का प्रतिनिधि कहा जाता है, इसलिए उनके अनुयायी चाहते थे कि धर्मगुरु किसी के अधीन नहीं रहें। इसी वजह से 1929 में रोमन कैथलिक चर्च और इटली के बीच में एक समझौता हुआ, जिसके बाद इस देश का गठन किया गया।

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अब हम सेंट पीटर स्क्वायर में थे। हजारों की तादाद में लगी कुर्सियां बता रहीं थीं कि यहां पोप अपने अनुयाईयों को संबोधित करते हैं। एक तरफ लंबे ऊंचे गेट पर नारंगी और नीली धरियों की वर्दी में गार्ड तैनात थे। बताया गया कि इसके भीतर पोप का निवास है। वह खिड़की भी देखी जहां से पोप अपने फॉलोअर्स को आशीर्वाद देने के लिए आते हैं। वेटिकन की अपनी रेलवे लाइन है,हेलिकॉप्टर है लेकिन एयर पोर्ट नहीं है। नजदीकी एयरपोर्ट रोम का है। यहां आधुनिक संचार साधन, इंटरनेट,टेलीफोन,पोस्टल सिस्टम,टेलीविज़न आदि भी हैं। वेटिकन सिटी परिसर में ही वेटिकन गार्डेन भी है जो रंग बिरंगे फूलों,अदूभुत मूर्तियों और फव्वारों से सजा है।


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वेटिकन सिटी में अन्य देशों की तरह लोकतांत्रिक प्रणाली नहीं है। यहां पर चुनाव नहीं होता है, न लोगों का कोई जनप्रतिनिधि होता है। यहां पर राजशाही व्यवस्था कही जा सकती है, जिसका राजा कैथलिक चर्च का पोप ही होता है। यहां की जनता के लिए जो भी फैसला लिया जाता है वो पोप के द्वारा लिया जाता है। भीड़-भाड़ वाले सेंट पीटर स्क्वायर में जेब कटने और पास से सामान खिसक जाने की गुंजाइश पूरी है। रोम में भी जेबकतरों से बचने की सलाह हर जगह दी जाती है। तेज गर्मी के बीच किसी तरह से छाया ढूंढ़ कर हमने थोड़ी राहत की सांस ली। लेकिन दुनिया की नायाब जगहों को देखने के लिए हर कष्ट मंजूर था। पोप को देखने, उन्हें सुनने का सपना तो पूरा नहीं हो पाया लेकिन यूरोप यात्रा का ऐसा आगाज रोमांचक था।


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कैसे पहुंचे वेटिकन सिटी

वेटिकन सिटी जाने वाले यात्रियों को पहले रोम में लियोनार्डो दा विंची-फिमिसिनो हवाई अड्डे के लिए अपने टिकट बुक करने होंगे, और फिर यहां तक पहुंचने के लिए कैब या टैक्सी लेनी पड़ती है। वेटिकन सिटी हवाई अड्डे से केवल 30 किमी दूर है।


फोटो व लेख - यशा माथुर





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