योग से तन-मन स्वस्थ, समाज सशक्त
- Yasha Mathur
- Jun 20, 2024
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Updated: Sep 21, 2024
यशा माथुर

‘स्वयं और समाज के लिए योग’, इस थीम के साथ आज हम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मना रहे हैं। मन, शरीर और समाज के लिए योग कितना लाभप्रद है इसे वही समझ सकता है जिसने योग को अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग बना रखा है। आमतौर पर बाहर से स्वस्थ दिखने वाले लोग न केवल शारीरिक कष्टों से ग्रसित होते हैं बल्कि एक अजीब मनोदशा से भी जूझ रहे होते हैं। दरअसल उनके जीवनकाल की कुछ लापरवाहियां या घटनाएं उन्हें शारीरिक और मानसिक कष्ट देती हैं। ऐसे में शरीर की पीड़ा और मन की भावनाओं पर उनका नियंत्रण नहीं रहता। योग उन्हें तन व मन से सशक्त बनाता है और जब वे स्वस्थ होते हैं तो एक स्वस्थ समाज का निर्माण होता है।

हमारी विरासत है योग
योग एक जीवनशैली है। योग का मतलब जुड़ना होता है। आसन, प्राणायाम, ध्यान हमें बहुत मदद कर सकता है। जैसे हम खाना खाते हैं, पेय पदार्थ पीते हैं, जिंदगी जीते हैं इसी तरह से योग को भी अगर हम अपनी जीवनशैली का अटूट हिस्सा बना लें तो न केवल शारीरिक रूप से सशक्त होंगे बल्कि मानसिक रूप से भी मजबूत रहेंगे और समाज के लोगों को मदद भी कर सकेंगे। सांस को शरीर के भीतर लेना, बाहर निकालना और ईश्वर से जुड़ जाना। तन, मन पर संयम प्राप्त करना और सात्विक जीवन की ओर मुड़ जाना। शरीरिक व मानसिक रूप से संबल प्राप्त करना और हर मुश्किल से लड़ जाना। यह सब हम किससे सीख सकते हैं? इस प्रश्न का एकमात्र जवाब होगा'योग'। योग भारतीय संस्कृति की पांच हजार वर्ष पुरानी विरासत है।

शांत व स्वस्थ रहने का मंत्र
हम अपनी दुनिया में इतने व्यस्त हैं कि सही तरीके से सांस भी लेना नहीं जानते। योग हमें ढंग से सांस लेना तक सिखाता है। इस सांस के जरिए ही हार्मोंस का संतुलन सुधारा जा सकता है। 16 साल के युवा से लेकर 60 साल बुजुर्ग भी योग से शांत जीवन गुजार सकते हैं। इससे हैप्पी हारमोन पैदा होते हैं। भावनात्मक संतुलन के लिए योग ही बेहतर जीवनशैली है। योग मात्र एक शारीरिक व्यायाम नहीं है बल्कि यह शरीर के आंतरिक अंगों को भी स्वस्थ करता है। यह एक ऐसा अनुशासन है जो हाथ पकड़ कर जीवन पार करवा सकता है। यह हमारी सांसों को दिमाग , शरीर और आत्मा से जोड़ता है। जब हम योग कर रहे होते हैं और सांसों के आवागमन पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे होते हैं तो हमारा तंत्रिका तंत्र भी प्रभावित होता है और हम काफी शांत व स्वस्थ महसूस करते हैं।

सशक्त समाज का आधार
एक सशक्त समाज के लिए हमारे तन और आंतरिक मन में संतुलन बने रहना आवश्यक है। आयंगर योग गुरु निवेदिता जोशी कहती हैं, ‘ योगासन न केवल हमें भावनात्मक रूप से मजबूत करते हैं ताकि हम सभी अवस्थाओं का सामना कर सकें। बल्कि योग एक आध्यात्मिक विज्ञान है जिसमें मन, बुद्धि और आत्मा का संपर्क बनता है। उज्जायी और अनुलोम-विलोम प्राणायाम आसान है और तुरंत राहत देते हैं। योग करने से मस्तिष्क को आक्सीजनयुक्त रक्त मिलता है। शवासन और प्राणायम काफी अच्छा परिणाम देते हैं। इन्हें अपनी दिनचर्या में शामिल कर लें। अगर आप रात भर सोए भी नहीं है तो इनके करने से जो गहरा आराम मिलेगा वह एक अच्छी नींद के बराबर होगा। अगर आप सूर्य नमस्कार कर पाते हैं तो इससे रक्त संचार नियमित होगा और नसें नियंत्रण में आ जाएंगी।‘

योग की तकनीक सरल
आप मकरासन कीजिए। कभी-कभी छोटे बच्चे दोनों कोहनियों को जमीन पर रख अपनी हथेलियों में चेहरे को रख लेते हैं और दोनों पैर चलाते हैं। इससे रीढ़ की हड्डी में मूवमेंट होती है। यह मकरासन है इसे मजाक में टीवी वाचिंग पोज भी कहते हैं। इसी तरह से योग में कई सरल तकनीकें हैं जिन्हें आप घर में प्रयोग कर सकते हैं। इसमें 75 प्रतिशत शरीर जमीन पर होता है।योगाचार्य डा. लक्ष्मी नारायण जोशी कहते हैं, योग में प्राण ऊर्जा ही सब कुछ है। जो हम खाते हैं उससे भी हमें ऊर्जा मिलती है। प्रकृति से भी हमें ऊर्जा मिलती है। अगर हम इस प्राण ऊर्जा की आपूर्ति निर्बाध रूप से अंगों तक बनाए रखें तो हमारे अंग हमेशा काम कर सकते हैं। यदि इन्हें तीन चीजें मिलती रहे तो हम कभी रोगी नहीं होंगे। एक हृदय से नियमित रक्त आपूर्ति, दूसरा मस्तिष्क से निकलने वाली तंत्रिकाओं की आपूर्ति और तीसरा, वह प्राण ऊर्जा जो अंग को चाहिए। यह सारी आपूर्ति उम्र के साथ ब्लॉक होने लग जाती है। जब हम घुटनों से लेकर पेट तक आप जमीन पर होते हैं। फेफड़े व दिल ऊपर होते हैं और पंपिंग करने के लिए स्वतंत्र होते हैं। गुरुत्वाकर्षण की स्थिति सब जगह बराबर आदर्श रहती है। स्पाइन की एस शेप बनी रहती है। ब्लड की सप्लाई ठीक हो जाती है। 26 बर्टिब्रा एक लाइन में आने शुरू हो जाते हैं और आपकी ऊर्जा खुलकर बहने लगती है। आपकी मांसपेशियां तनावमुक्त हो जाती हैं। इस आसन में जहां साइटिक नर्व दब रही है वह क्षेत्र धीरे से खुल जाता है। उसकी स्थिति सही हो जाती है। वहां से दबाव हट जाता है और आपको तुरंत आराम मिल जाता है। यदि आप सही प्रकार से आसन करते हैं तो सब कुछ सही हो जाता है।

सेलेब का प्रिय योग
योग करते समय जब 'ऊं' की अनुगूंज वातावरण में फैलती है तो वह आत्मा को झकझोर देती है। योग करने के बाद एकदम हल्कापन महसूस होता है। हमें घर में तीन फीट की जगह चाहिए जहां बैठकर या लेटकर हम योग कर सकते हैं। इसके लिए कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं है। बिस्तर से उठकर दैनिक क्रिया के बाद हम योग कर सकते हैं। आज की जीवनशैली के तनाव महिलाओं को कमजोर कर रहे हैं। ऐसे में सेलेब्रिटीज तक योग को अपने जीवन की अभिन्न गतिविधि बना रहे हैं। बॉलीवुड एकटर दीपिका पादुकोण ने भी योग से ही अपने अवसाद पर जीत पाई। वह कहती हैं, ‘मैं हमेशा योग की शुक्रगुजार रहूंगी। इसके चलते ही मैं डिप्रेशन से निकल पाई। नियमित योग ने जबरदस्त असर दिखाया। आज योग मेरी दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। रोजाना घर पर नियमित रूप से योग करती हूं। खास तौर पर सूर्य नमस्कार और शवासन। योग ध्यान है। मैं अपने शरीर को कभी भी तनाव में नहीं रखना चाहती। मांसपेशियों को आराम की जरूरत होती है और यह आराम योग से ही मिलता है।‘ योगासन, ध्यान, प्राणायाम हमारे के मन की दशा को संतुलित कर देते हैं। रोगों के उपचार के रूप में भी योग बेहतरीन औषधि है। इसे विदेशी महिलाओं ने भी समझा है। आस्ट्रेलिया की लॉरेन ने जब वाराणसी के घाट पर लोगों को योग करते देखा तो आश्चर्यचकित रह गईं और उन्होंने योग को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया। लॉरेन बताती हैं, 'आस्ट्रेलिया में योग लेाकप्रिय है लेकिन भारत में योग करते वक्त ठहराव, नियम आदि सब निश्चित हैं। मुझे शारीरिक व मानसिक थकान व तनाव रहता था। योग के बाद काफी राहत मिली।‘

युवा पीढ़ी के आदर्श उम्रदराज
योग को जीवन में नियमित रूप से अपना कर निरोग व खुश रहने वाले यह उम्रदराज लोग आज की उस युवा पीढ़ी के लिए आदर्श के समान हैं जिसकी लाइफस्टाइल में काम के घंटे तो तय हैं लेकिन खाने-पीने, सोने का कोई अनुशासन नहीं है और वे कम उम्र में ही सेहत को दांव पर लगा रहे हैं और अवसाद तक पहुंच रहे हैं। योग उनके लिए काफी कारगर सहायक हो सकता है। अभिनेत्री लारा दत्ता कहती हैं कि मैं मॉडलिंग करती हूं, फिल्मों में एक्टिंग कर रही हूं, मेरा प्रोडक्शन हाउस भी है। मां हूं, परिवार की जिम्मेदारियां हैं लेकिन मैं उन्हें भली प्रकार से निभाती हूं। योग और व्यायाम की बदौलत ही इन सब कामों के लिए ऊर्जा सहेज पाती हूं। अगर कभी तनाव होता भी है तो मेडिटेशन कर लेती हूं।


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